कवितावली

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भाग-4 किष्किन्धा काण्ड

भाग-4 किष्किन्धा काण्ड प्रारंभ (समुद्रोल्लंघन) जब अंगदादिनकी मति-गति मंद भई , पवनके पूतको न कूदिबेको पलु गो। साहसी ह्वै सैलपर सहसा सकेलि आइ, चितवत चहूँ ओर, औरति को कलु गो। ‘तुलसी’ रसातल को निकसि सलिलु आयो, कालु कलमल्यो, अहि-कमठको बलु गो।ं चारिहू चरन के चपेट चाँपें चिपिटि गो, उचकें उचकि चारि अंगुल अचलु गो।। (इति किष्किन्धा काण्ड )
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