जाति पाँति नाना भांति कुल अभिमान तजि
Abhilash Battisi — श्री चंद्र लाल गोस्वामी जी
Verse 3 of 4
राधा कृष्ण गावै रोम-रोम हरसावै,
मोद झरी सी लगावै पुलाकैव अंग-अंग में। [1]
बात यौ बनावै तामें रूप लै दिखावै,
आप छकै और छकावै सुख पावै या प्रसंग में॥ [2]
पामर पतित महा कपटी कदर्ज नर,
तिनहूँ कौ खंचि बोरि देत प्रेम-रंग में। [3]
कहत अभंग में यौं हिय की उमंग में,
जू मोहि राखौ सदा ऐसे रसिकन संग में॥ [4]
- श्री चंद्र लाल गोस्वामी जी, अभिलाष बत्तीसी
राधा कृष्ण गाते हैं रोमा-रोम हरस्वै, मोद झरि सी लगावै पुलकैव अंग-अंग पुरुषा। [1]. [3] कहते हैं कि अखंड पुरुष उत्साह का धनी होता है, ऐसे प्रेमियों से सदैव प्रेम बनाए रखें.. [4] - श्री चंद्र लाल गोस्वामी जी, अभिलाष बत्तीसी