सोय सोय सबकाम विगारा
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 107 of 115
(राग खिमटासिंधुका)
सोय सोय सबकाम विगारा ।
गौरशयामरसरूप न चाखा जुगुललाल अस नाम विसारा॥
ललितकिशोरी श्रीवृन्दावन सो धनहूँ ना चित्त सम्हारा ।
चेत चेत वे मूरख मनुआं जीती वाजी जाता हारा॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२५०)
(राग खिमातासिन्धुका) सोया सोया सबका विगारा। गौरश्यामरसोप न चखा जुगुलाल आस नाम विषारा।।ललित किशोरी श्री वृन्दावन सो धनि, न मन सहारा। होश में रहते हुए भी वह मूर्ख उतना ही खो देता है जितना मनु.. - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (250)