राधा नाम को आधार
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 13 of 115
(कवित्त)
शेष ओ सुरेश त्यों गणेश ईश आदि देव,
गावत हैं ब्रह्म पद सर्व सुख देनुरी।
चिंतामणि पाये तें चिंतामणि दूर होत,
कामनाहूँ देत कल्प वृक्ष काम धेनुरी॥ [1]
कोटिन अनेक पद गाये जे पुरान वेद,
एरी सब भले वे मोकों कहा लेनुरी।
केलैं जहं प्रिया लाल कुंजों रसमसे चूर,
मेरी तो जीवन मूर वृन्दावन रेनु री॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, शिक्षा पत्रिका (28)
(कविता) शेष हे सुरेश त्यों गणेश ईश आदि देव, गावत है ब्रह्म पद सर्व सुख दाता। चिन्तामणि पावें, दस चिन्तामणि जाय, चाहूँ कल्प वृक्ष, काम धेनुरी.. [1] पुराणों और वेदों में कितने श्लोक हैं, सभी अच्छी बातें लेनुरी कहलाती हैं। मैं दीवाना हूं प्रिया लाल कुंजन, मैं दीवाना हूं, मेरे प्राण वृन्दावन में मरे, रेनू.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, शिक्षा पत्रिका (28)