राधा नाम को आधार

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 27 of 115

निधुवन द्रुम डारिन कवै, ह्वैहौं पक्षी कीर। राधारमणलाल को, रटि रटि होंहुं अधीर॥ - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (66) निधुवन द्रुम डारिन कवै, ह्वैहौं पक्षी कीर। राधारमणलाल को, मैं अधीर हूं... - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (66)
जमुना-पुलिन कुंज गहबर कीप्यारीजू कौन तिहारी खोट