प्यारीजू कौन तिहारी खोट
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 28 of 115
(राग भैरवी)
प्यारी जू कौन तिहारी खोट।
मोसों बनी न कछु वै स्वामिनी हौं औगुन की मोट॥ [1]
श्रीवन दरस दिखायके राधे मेटो जियकी चोट।
ललितकिशोरी कौ अपनावहु गही तिहारी ओट॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (68)
(राग भैरवी) प्यारी जू कौन तिहारी खोट। मैं महीनों के बारे में कुछ नहीं कहती, मैं महीनों की मालकिन हूं.. [1] श्रीवन दरस दखायके राधे मेटो जिया की चोट। ललित किशोरी कौ अपानवहु गहि तिहारी ओट.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (68)