प्यारीजू कौन तिहारी खोट

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 29 of 115

(राग भैरवी) प्यारीजू कौन तिहारी खोट। मोसों वनी न कछु वै स्वामिनि, हों औगुनकी मोट॥ [1] श्रीवन दरस दिखायके राधे, मेटो जियकी चोट। ललितकिशोरी को अपनावहु, गही तिहारी ओट॥ [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (68) (राग भैरवी) प्यारीजू कौन तिहारी खोट। मोसो वाणी न कछु वा स्वामिनी, होना अगुनकी मोट.. [1] श्रीवन दरस ढायके राधे, मेतो जियाकी चोट। ललित किशोरी को अपानवहु, गहि तिहारी ओट.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (68)
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