राधा नाम को आधार
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 35 of 115
मिलिहै कब अंग छार ह्वै, श्रीवनवीथिन धूर।
परिहैं पद पंकज जुगुल, मेरी जीवनमूर॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (74)
मिल्है जब अंग चार हावै, श्रीवनविथिन धुर। परिहिन पद पंकज जुगुल, मेरी जीवनमुर.. - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (74)