मोकों आस स्वामिनी तेरी

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 36 of 115

(राग मालकोश) मोकों आस स्वामिनी तेरी। करे पान विन जुगुलमाधुरी तलफत अंखियां मीनसी मेरी॥ [1] परवस प्राण परो नहिं निकसत श्रीवन दरस हिये उरझेरी। ललितकिशोरी ढरनि ढरौ निज मिलौ वेगि जनि करौ अवेरी॥ [2] - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (75) (राग मालाकोश) मोकोन अस स्वामिनी तेरी। करे पान विन जुगुलमाधुरी तलफत अंखिया मिनासी मेरी.. [1] पर्व प्राण परो नहि निकासत श्रीवन दरस हिये उराजहेरी। ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (75)
राधा नाम को आधारराधा नाम को आधार