राधा नाम को आधार

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 37 of 115

सुमन वाटिकाविपिन में, ह्वैहौं कबहूं फूल। कोमलकर दोउ भामते, धरिहैं वीनि दुकूल॥ - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (78) सुमन वाटिकाविपिन पुरुष, तुम कब पूर्ण हो? कोमलाकर दो भम्ते, धरिहैं विनि दुकुल.. - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (78)
मोकों आस स्वामिनी तेरीस्वामिनि हौं पतितन शिरताज