येहो स्वामिनि गजगामिनि मनभामिनि
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 39 of 115
(राग परज)
अहो लडैति प्राणपियारी, श्रीवन कवै बसावोगी।
रसिकराय प्रीतम संग राधे, मधुरी तान सुनावोगी॥ [1]
दोना ललित कदम के माहीं, दधि मेरे कर पावोगी।
ललितकिशोरी लालन मुख दै, जूठन मुहूँ खवावोगी॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (83)
(राग परजा) ओह लड़ाइति प्रणपियारी, श्रीवन कवै बसावोगी। रसिकराय प्रीतम संग राधे, तुम सुनोगी माधुरी.. [1] ललित कदम, दोनों की मां, मेरी भाभी कर सकेगी। ललित किशोरी लालन मुख दाई, जूठन मुख खवावोगी.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (83)