राधा नाम को आधार
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 45 of 115
कीट पतंग पिपीलिका, मरकट भृंग मयूर।
जुगलबिहारी कीजिए, वृन्दावन की धूर॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (97)
किट पतंग पिपिलिका, मारकाट भृंग मयूर। वृन्दावन के आधार स्तम्भ जुगलबिहारी कीजी.. - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय शृंगार शतक (97)