राधा नाम को आधार

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 46 of 115

जुगल बिहारी विरह में, नाहिंन अब अवकास। ललितकिशोरी दीजिये, श्रीवृन्दाबन वास॥ - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (98) जुगलबिहारी बिछड़ा हुआ आदमी है, अब उसके लिए कोई ठिकाना नहीं। दे ललित किशोरी, श्री वृन्दावन वास.. - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (98)
राधा नाम को आधारराधा नाम को आधार