राधा नाम को आधार
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 47 of 115
यही कर्म यही धर्म है, यही उपासन ज्ञान।
कै ब्रजसुख इन दृग लहों, कै छुटि पहुँचें प्रान॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (99)
यही कर्म है, यही धर्म है, यही भक्ति है, यही ज्ञान है। दीर्घ जीवन में कहाँ ब्रज का सुख, कहाँ जीवन का पलायन.. - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (99)