कवधौं कृपा लाड़िली ह्वै है
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 50 of 115
(राग खम्माच)
हेस्वामिनि श्रीकुंजविहारिनि, वेगि खवरि मेरी लीजै।
सेवा रीति कछू नहिं जानौं, चूक छिमा करि दीजै॥ [1]
अति आधीन दीन रटि टेरों, चित्तदै यह सुनि लीजै।
ललितकिशोरी कुंज निकुंजन, रज अधिकारी कीजै॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (122)
(राग खम्माचा) हेस्वामिनी श्रीकुंजविहारिणी, वेगी खवारी मेरी लिजै। मैं सेवा के बारे में कुछ नहीं जानता, मैं बस इसे छिपाऊंगा। ललित किशोरी कुंज निकुंजन, राज अधिकारी की.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (122)