कवधौं कृपा लाड़िली ह्वै है
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 52 of 115
(राग खम्माच)
कवधौं कृपा लाड़िली ह्वै है, श्रीवन माहिं वसौंरी।
श्यामाश्याम महाछवि अनुपम, इन नैनन निरखौंरी॥ [1]
दै गलवांह जुगुलवर राजैं, हों यह सुखै लहौंरी।
सुनियो टेर कृपानिधि राधे, पुनिपुनि विनै कहौंरी॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (124)
(राग खम्माचा) कवधौं कृपा योद्धा, श्रीवन मही वसौंरि। श्यामाश्याम महाछवि अनुपम, निरखौंरि में नैनन। [1] दै गलावन्ह जुगुलावर राजेइन, होन याह सुखाई लहौंरी। कृपानिधि सुनो पुनीपुनि विनइ कहौंरि.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (124)