यह अभिलाष लडैती मोरी

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 54 of 115

(राग पूर्वी) यह अभिलाष लडैती मोरी, तुम लालन संग मुदित विराजौ, मोहिं करौ मुखचंद चकोरी॥ [1] देहु कृपा करि बेगी छबीली, ललित किशोरी मान निहोरी। निस दिन नित्य निकुंज भवन में हाज़िर रहौं वृषभानु किशोरी॥ [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (179) (राग पूर्वी) यः अभिलाष लड़ैती मोरी, तुम लालन संग मुदित विराजौ, मोहिं करो मुखचंद चकोरी.. [1] देहु कृपा कारी बेगी छबीली, ललित किशोरी मन निहोरी। वृषभानु किशोरी, निकुंज भवन में नित्य निवास.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (179)
राधा नाम को आधारकालीदह कूल कुंजके माहीं