राधा नाम सों चित रांच

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 61 of 115

(राग देस) गैल श्रीवृन्दावनकी गहिये। सेवाकुंज कौनमें बैठे जुगुललाल छवि लहिये॥ [1] रसिकनके पग चांपि हुलसिये श्यामगौर मुख कहिये। 'ललितकिशोरी' जाविधि राखैँ ताहीविधि मन रहिये॥ [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (228) (राग देसा) गेल श्रीवृंदावनकी गहिये। सेवा कुंज के कोने में बैठे हैं, जुगुलाल की छवि लेकर.. [1] रसिकना के चरण कहो, श्यामगौर का मुख कहो। 'ललित किशोरी' विधि का ध्यान रखें.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (228)
राधा नाम सों चित रांचश्री वृंदावनरज दरसावै सोई