श्री वृंदावनरज दरसावै सोई

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 62 of 115

(राग जिला झिंझोटी) जब श्रीवनवास मिलो सजनी, तब तीरथ आन गए न गए। जब लाड़लीलाल को नाम लयो, तव नाम न आन लये न लये॥ [1] पदकंज किशोरीहि चित्त पग्यो, तव पायन आन नए न नए। जब नैन लगे मनमोहनसों, तब औगुन आन भये न भये॥ [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (233) (राग जिला झिंझोटी) जब श्रीवनवास मिलो सजनी, तब तीरथ एन गे एन गे। जब लाडली लाल को नाम लायो, ​​तव नाम एन न लाये एन न लाये.. [1] पडकंज किशोरी चित्त पाग्यो, तव प्याण आन न लाये एन न लाये। जब आंखें मनमोहनासन जैसी हो जाएं, तब औगुन अन भये न भये.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (233)
राधा नाम सों चित रांचस्वामिनि हौं पतितन शिरताज