स्वामिनि हौं पतितन शिरताज
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 63 of 115
(राग जंगला)
कर सखि वृंदावन सों हेत।
तजि परपंच अरुन हरियारे कारे पीरे सेत॥ [1]
ललितकिशोरी लालरुप लख वननिकुंज संकेत।
दारा सुत जो संग न छाँडै वसिये कुटुम समेत॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (240)
(राग जंगला) पुत्र हेतु कर सखी वृन्दावन। तजि परपंच अरुण हरियारे करे पीर सेत.. [1] ललित किशोरी लालरूप लाख वाणीकुंज संकेत। दारा सुत जो संग न छंदै वासिये कुटुम समेट.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (240)