ऐसी को करिहै श्रीराधा
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 69 of 115
(राग ईमन)
ऐसी को करिहै श्रीराधा।
मेट्यो तिमिर हिये दासी को, कहत नाम निज आधा॥ [1]
‘ललितकिशोरी’ चरन उपासन, जो काहू दृढ़ साधा।
निश्चै जुगुल प्रकासैं ता उर, मिटै त्रिविध जगवाधा॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (292)
(राग ईमान) श्रीराधा ऐसा करती हैं। मेट्यो तिमिर हिय दासी को, कहत नाम निज अधा। [1] 'ललित किशोरी' के चरणों में प्रणाम, जो कहे सो सदा बलवान। निश्चय जुगुल प्रकाशैन ता उर, मितै त्रिविध जगवधा। [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (292)