राधा नाम सों चित रांच
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 72 of 115
(राग देस उतरी)
अब विलम्ब जिन करहुँ लाड़िली कृपा दृष्टि टुक हेरो।
यमुना पुलिन गलिन गहवर की बिचरू साँज सवेरो॥
निसि दिन निरखूँ युगल माधुरी रसिकनते भव भेरो।
ललित किशोरी तन मन व्याकुल जीवन चरण बसेरो॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२६)
(राग देश उतारी) अब, अगर मैं देर करूंगा तो मेरी लड़ने की दयालुता खत्म हो जाएगी, हीरो। यमुना पुलिन गूलिन गहवर के गरीब संज सवारो.. हर दिन प्रेम और आनंद के आनंदमय जोड़ों से भरा हो। तन-मन से व्याकुल ललित किशोरी, जीवन के रंगमंच पर.. - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (26)