अग्र काम हरिनाम से, संकट होत सहाय
Agragrnthavali — श्री अग्रदास जी
Verse 1 of 4
अग्र आलकस जनि करो, हरि भजिबे के हेत।
बहुत गई थोड़ी रही, थोड़े में हूँ चेत॥
- श्री अग्रदास जी, अग्रग्रंथावली
अलकास को जनम दे, तो हरि भजिबे खातिर। अनेक गीत, कुछ यात्री, कुछ मुख्य, चेतना.. - श्री अग्रदास जी, आगरा ग्रंथावली