अग्र काम हरिनाम से, संकट होत सहाय

Agragrnthavali — श्री अग्रदास जी

Verse 2 of 4

'अग्र' भजन आतुर करो, जौ लौं पंजर श्वास। नदी किनारे रूखरा, जब कब होय विनास॥ - श्री अग्रदास जी, अग्रग्रंथावली 'आगरा' भजन, मुझे उत्सुक करो, मुझे अपनी पसलियों में सांस लेने दो। सूखी नदी तट पर, जब भी जीत होती है... - श्री अग्रदास जी, अग्रग्रंथावली
अग्र काम हरिनाम से, संकट होत सहायअग्र काम हरिनाम से, संकट होत सहाय