अग्र काम हरिनाम से, संकट होत सहाय
Agragrnthavali — श्री अग्रदास जी
Verse 4 of 4
‘अग्र’ उभय ताकि बनी, है सन्तनके साथ।
इक द्वै द्वै अरु चूपरी, पुनि लाडू दो हाथ॥
- श्री अग्रदास जी, अग्रग्रंथावली (1.45)
'आगरा' दोनों के लिए बनी है, बच्चों के लिए। एक द्वै द्वै अरु छुपरी, पुनि लड्डू दो हाथ.. - श्री अग्रदास जी, अग्रग्रंथावली (1.45)