नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 101 of 106

नारायण दो बात सों, अधिक और नहिं बात। रसिकनको सत्संग नित, युगलध्यान दिनरात॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (183) नारायण को एक ही पुत्र दो, और नहीं, और नहीं। रसिकानाको सत्संग नित, युगल ध्यान दिन-रात.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (183)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै