नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 102 of 106

नारायण जाके हृदय, सुंदर स्याम समाय। फूल पात फल डारमें, ताको वही लखाय॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (168) नारायण के हृदय में जाइये, सुन्दर संध्या। फुल पट फल दरमेन, ताको वही लखाय.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (168)
नारायण दुख सुख उभैनारायण मन में बसी लोक लाज कुलकान