नारायण मन में बसी लोक लाज कुलकान

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 103 of 106

नारायण मन में बसी, लोक लाज कुलकान। आशक होना श्याम को, हाँसी खेल ना जान॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रास (127) मन में नारायण का वास है, लोग लज्जित हैं। श्याम में आँसू तो होने चाहिए, हँसी नहीं.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (127)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै