नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 12 of 106

रे मन क्यों भटकत फिरत, भज श्री नन्दकुमार। नारायण अबहूँ समझ, भयो न कछु बिगार॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (26) क्यों भटकता रहता है मन, भज श्री नंदकुमार। नारायण, अब मैं समझ गया, कुछ नहीं बदलेगा.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (26)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै