नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 14 of 106

उर भीतर अति चाहना, बाहर राखत त्याग। नारायण वा त्याग पै, परो भार की आग॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (30) अंदर तुम्हारे पास बड़ी इच्छाएं हैं, बाहर तुम्हारे पास बलिदान हैं। नारायण वा त्याग पै, पारो भर आग.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (30)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै