नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 17 of 106

बात बनावै ज्ञान की, भोगन को ललचात। नारायण कलिकाल के, कौतुक कहे न जात॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (33) आनंद लेने के लिए आकर्षक ज्ञान का भंडार बनाएँ। कलिकाल के नारायण को अद्वितीय नहीं कहा जा सकता.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (33)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै