नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 18 of 106
नारायण सत्संग कर, सीख भजन की रीति।
काम क्रोध मद लोभ में, गई आयुबल बीति॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (34)
नारायण सत्संग करो, सिख भजन की परंपरा। काम, क्रोध और लालच के बीच, कोई कुंवारी बेटी नहीं है.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (34)