नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 2 of 106
बहुत गई थोरी रही, नारायण अब चेत।
काल चिरैया चुग रही, निशिदिन आयु खेत॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (09)
बहुत भ्रम हो गया, नारायण अब सचेत हो गये। समय पर पक्षी चुग रहे हैं, खेत खाली हैं.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (09)