नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 3 of 106
वृन्दावन जे वास कर, शाक पात नित खायँ।
तिनके भागिन को निरख, ब्रह्मादिक ललचायँ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (06)
अगर आप वृन्दावन में रहते हैं तो रोजाना सब्जियां खाएं। तिनका बहिन निर्दोष ब्रह्मदिक लोभ.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (06)