नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 4 of 106
नारायण व्रज भूमिकूं, सुरपति नावें माथ।
जहां आय गोपी भये, श्रीगोपेश्वर नाथ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (08)
नारायण व्रज भूमिकुम, सुरपति नवीन मठ। जहाँ गोपी भये, श्री गोपेश्वर नाथ.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (08)