नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 38 of 106

भीतर सों मैलो हियो, बाहर रूप अनेक। नारायण तासों भलो, कौआ तन मन एक॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (62) अंदर का सोना मीठा है, बाहर के रूप अनेक हैं। नारायण तसों भालो, काग तन मन एक।।- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (62)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै