नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 52 of 106

संत जगत में सो सुखी, मैं मेरी को त्याग। नारायण गोविंद पद, दृढ़ राखत अनुराग॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (93) इस संसार का साधु सुखी है, मैं अपनी पत्नी का परित्याग करता हूँ। नारायण गोविंद पद, दुर्भा राखत अनुराग.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (93)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै