नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 53 of 106
जिनको मन हरिपद कमल, निशिदिन भ्रमर समान।
नारायण तिनसों मिले, कबूँ न होवै हान॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (97)
जिसका मन हरे कमल के समान भ्रमों से भरा है। नारायण तिनसन मि, कबुन न होवै हन.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (97)