नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 54 of 106

कपट गाँठि मन में नहीं, सबसों सरल सुभाव। नारायण ता भक्तकी, लगी किनारे नाँव॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (96) मन में कपट का लेश भी नहीं, सब साधारण नेक इरादे हैं। नारायण तन भक्तकी, लागी किनारे नानाव.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (96)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै