नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 55 of 106
नारायण दुख सुख उभै, भ्रमत यथा दिन रात।
बिन बुलाय ज्यों आ रहैं, बिना कहे त्यों जात॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (101)
दिन के अनुसार नारायण, दुःख, सुख, उलझन, उलझन। ऐसे आना जैसे बिन बुलाए, बिना बताए चले जाना.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (101)