नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 56 of 106

नारायण हरिकृपाकी, तकत रहै नित बाट। जानहार जिमि पार को, निरखत नौका घाट॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (102) नारायण हरिकृपाकि, बल सर्वदा। जनहर जिमि पार को, निरखत नाव घाट.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (102)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै