नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 57 of 106

जे रसिकन उर नित बसें, निगमागम को सार। नारायण तिन चरण की, बार बार बलिहार॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (121) जे रसिकन उर नित बेसन, निगमगम को सार। तीन चरणों के नारायण, बारंबार बलि.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (121)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै