नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 58 of 106

नन्दलाल कीरति कुंवरि, कहिबे कूँ यह दोय। ज्यों तन की छाया प्रगट, तनसों बिलग न होय॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (122) नन्दलाल कीर्ति कुँवरि, कहिबे कुण ये दोय। जैसे शरीर की छाया प्रकट होती है, वैसे शरीर मिटता नहीं.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (122)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै