नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 59 of 106

नारायण होवै भलें, जो कछु होवन हार। हरिसों प्रीति लगायके, अब कहा सोच विचार॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (125) नारायण तो हैं, चाहे कुछ भी हो। हरिसन ने मुझे प्यार किया, अब कहा विचार.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (125)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै