नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 60 of 106
चलत फिरत बैठत उठत, लगी रहे यह आस।
श्याम राधिका निरखिबो, वृन्दाविपिन निवास॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (124)
चलने-फिरने, उठने-बैठने पर ऐसा ही महसूस होता है। श्याम राधिका निराखिबो, वृंदाविपिन निवास.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (124)