नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 61 of 106

नेहडगर में पग धरै, फेर विचारै लाज। नारायण नेही नहीं, बातन को महराज॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (128) जब मैंने नेहदागर में कदम रखा तो मेरे मन में शर्मिंदगी का ख्याल आया। नारायण, नहीं, मुझे मत बताइये महाराज.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (128)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै