नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 62 of 106
गढि गढि कें बातें कहे, मन में तनक न प्रीत।
नारायण कैसे मिले, साहब सांचे मीत॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (130)
गढ़ी गढ़ी के बारे में क्या कहूं, मेरे मन में प्रेम की कोई टीस नहीं है. कैसे मिलें नारायण, साहेब सांचे मिट.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (130)