नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 63 of 106
नारायण प्रीतम निकट, सोई पहुँचनहार।
गेंद बनावै सीस की, खेलै बीच बजार॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (133)
नारायण प्रीतम निकट हैं, सोये हुए हुंचनहार। गेंद सीसे से बनी होती है और बाजार में खेली जाती है.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (133)