नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 71 of 106
तौलौं यह फांसी गरे, वर्णाश्रम व्रत नेम।
नारायण जौलौं नहीं, मुँह दिखरायो प्रेम॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (143)
ये वर्णाश्रम व्रत के नाम पर अटके हुए बोझ हैं. नारायण ईर्ष्या नहीं करते, बल्कि प्रेम दिखाते हैं.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (143)