नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 72 of 106
मृदु मुसकान निहारि के, धीर धरत है कौन।
नारायण कै तन तजै, कै बौरा के मौन॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (111)
निहारी की मन्द मुस्कान, धैर्यवान कौन? नारायण का शरीर चला गया, आकाश का मौन कहां है.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (111)